लेखनी प्रतियोगिता -13-Apr-2022# घर का चांद
लाला गिरधारी लाल के पोते की अभी नयी नयी शादी हुई थी पांच पीढ़ियों से लाला जी के यहां लड़की का जन्म नही हुआ था गिरधारी लाल जी के पिता जी की भी कोई बहन नही थी ।हर साल पंडित आकर रक्षाबंधन पर राखी बांध जाता था।मन मे बड़ी कसक थी कि हे भगवान ऐसा मेरे खानदान से क्या पाप हो गया जो हमारा खानदान कन्या जन्म के लिए तरस गया।
एक दिन गिरधारी लाल जी को सपने मे अपना गांव वाला पैतृक निवास दिखाई दिया और उसके आंगन मे एक छोटी सी कन्या खेलती दिखाई दी ।सपने मे ही गिरधारी लाल जी बहुत खुश हो गये कि साक्षात लक्ष्मी का आगमन हो गया हो।पर थोड़ी ही देर मे क्या देखते है कि वह कन्या मिट्टी से लथपथ जोर जोर से सांस ले रही है और उसने उनके आगे ही दम तोड़ दिया।तभी गिरधारी लाल जी हड़बड़ा कर उठे।और सपने की फाल (मतलब) निकालने लगे। उन्होंने अपने गुरुदेव के आश्रम मे जाकर उन्हें अपने सपने के विषय मे बताया तब गुरुदेव बोले,"भाई ,मुझे तो इस सपने से यही समझ आता है कि आप के यहां किसी कन्या की हत्या की गयी है।"सेठ जी एकदम सकते मे आ गये कि कौन होगा जिसने कन्या की हत्या की हो।वे अपने पैतृक गांव पहुंचे वहां जाकर उन्होंने जहां वो लड़की मिट्टी से लथपथ दिखाई दी थी वहां जा कर आंगन की खुदाई करवाई।सेठ जी आश्चर्य चकित रह गये आंगन मे जिस कौने मे वो लडकी मरते हुए दिखी थी वहां एक दस बारह साल के बच्चे का नरकंकाल मिला हां सेठ जी को ये पता था कि उनकी बडी पीढ़ी मे उनकी परदादी के बहुत सी लड़कियां थी बड़ी मुश्किल से उनके दादा जी सात बहनों के बाद हुए थे।पर जब उनके दादा जी पैदा हुए उससे एक साल पहले उनकी एक बहन अचानक से गायब हो गयी थी।ये सब दादा जी छोटे गिरधारी लाल जी को बताया करते थे।सेठ जी को माजरा समझते देर नही लगी कि कही परदादी ने बेटे के लालच के लिए अपनी ही बेटी की बलि तो नही दे दी। गिरधारी लाल जी ने बड़े ही सम्मान से उस नरकंकाल की अंत्येष्ठि की और हाथ जोड़कर नाक रगड़ कर माफी मांगी।कि मेरे पूर्वज से जो ग़लती हुई है उसका मै क्षमा प्रार्थी हूं।ये सब करके सेठ जी गांव से शहर आये तो खुशखबरी मिली कि पोते की बहू मां बनने वाली है ।बेटी की आस मे सारा परिवार नौ महीने गुजार देता है नौ महीने आठ दिन बाद बहू को लेबर पेन शुरू हुआ बेटा ,पोता और बहू तीनों साथ गये अस्पताल पीछे से गिरधारी लाल जी बस यही दुआ करते रहे ,"हे मां।अब तो अपना सलोना सा रूप इस घर आंगन मे भेज दो।दोपहर को पता चला बहू ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया है।लाला जी ने दो दिन तक बैण्ड बाजा बजवाया और जब अस्पताल से घर ला रहे थे तो सारे रास्ते फूलों की वर्षा करवाई।सेठ जी ने पहली बार जब पोती को हाथ मे लिया तो यही कहा ,"तू मेरे घर का चांद है चल मेरे साथ अपनी चांदनी से मेरे घर को रोशन कर दे।"लाला जी की आंखों से आंसू अविरल बह रहे थे।
Shrishti pandey
15-Apr-2022 09:21 AM
Very nice
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Monika garg
15-Apr-2022 10:17 AM
धन्यवाद
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Abhinav ji
15-Apr-2022 08:37 AM
Nice👍
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Monika garg
15-Apr-2022 08:49 AM
धन्यवाद
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Punam verma
14-Apr-2022 08:35 AM
Nice one mam
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Monika garg
14-Apr-2022 11:13 AM
धन्यवाद
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